छोटे से शहर का छोटा सा पोर्टल जब बार बार ट्रेंड करता है नेशनल मीडिया में दो लोगों को पता चलता है की पैसे के दम पर पत्रकारिता नहीं चला करती उसके लिए जज़्बा होना चाहिए। 
साल भर से कम समय में सीकर टाइम्स बारबार नेशनल मीडिया के बराबर आता है और कई बार उसे पछाड़ता भी है। 


राजस्थानी पत्रकार कमज़ोर हैं, कुचले हुए हैं  

राजस्थान से जुड़ा मुद्दा रानी पद्मावती पर बनी विवादित फ़िल्म पर मीडिया ने जी भरकर मनमानी की थी उस समय हमारे दो वीडियो आने से पहले नेशनल मीडिया की हेडलाइन राजस्थान के विरुद्ध हुआ करती थी। असल बात यह है कि नेशनल मीडिया पर ज़्यादातर रहा उत्तर प्रदेश और बिहारी पत्रकारों का क़ब्ज़ा है और उन्हें राजस्थान के बारे में बिलकुल भी समझ नहीं है ऐसे पत्रकारों का इतिहास भी काफ़ी कमज़ोर है और क्योंकि मीडिया मालिक उन्हें के प्रदेशों से आते हैं इसलिए वो अपनी जानकारी को ही सर्वोपरि मानते हैं। 

सीकर के इंटरव्यू ने राष्ट्रीय हैडलाइन बदली 

श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के राष्ट्रीय महासचिव उम्मेद सिंह करीरी से जब हमने इंटरव्यू लिया तो रात ही रात में मीडिया वालों की हेडलाइंस चेंज हो गयी। असली बातों और मुद्दों को हम ढूंढ के लाए थे और जनता ने पहली बार सच का सामना किया था। वो इंटरव्यू शाम 7 बजे अपलोड हुआ था और 10 बजते बजते पुण्य प्रसून वाजपेयी के प्रोग्राम की हेडलाइन राजस्थानी गुंडा गर्दी से बदलकर मान सम्मान बन गई थी। उस वीडियो को 22,00,000 से ज़्यादा लोगों ने देखा। दो ही दिन बाद हमने श्री राजपूत सभा के कान सिंह  निर्वान का इंटरव्यू लिया जिससे फिर नेशनल हेडलाइन मिली। उस इंटरव्यू को भी 12 लाख से ज़्यादा लोगों ने देख डाला। मीडिया भागी भागी चित्तौड़गढ़ पहुँची और वहाँ क्षत्राणियों से बात की जिसे आज तक, जी न्यूज़ और बाक़ी मीडिया वालों ने भी अपने अपने गैर जिम्मेदाराना तरीक़े से दिखाया मगर नेशनल मीडिया का कोई भी वीडियों 40-50,000 से ज़्यादा नहीं चला। सीकर टाइम्स ने भी उसी समय सीकर की क्षत्राणियों  का आक्रोश दिखाया जिसे 7,00,000 से ज़्यादा बार देखा गया। 

नेशनल मीडिया की साख को पहली बार चुनौती मिली 

अचानक से एक ऐसा माहौल बन गया जिसमें नेशनल मीडिया को अपनी साख बचाने के लिए समझ नहीं आ रहा था क्या करें। हमें कई नेशनल मीडिया की तरफ़ से जुड़ने के ऑफ़र आने लगे मगर हम पहले ही नेशनल मीडिया की कारगुजारियों के विरोधी रहे हैं इसलिए हम सीकर में ही रह कर उन्हें ललकारते रहे और समय समय पर नेशनल मीडिया को धूल चटाते रहे। पूरी मीडिया में केवल सीकर टाइम्स ही दूसरे मीडिया के भ्रष्टाचार की ख़बरें दिखा सकता है और हमने कोबरा पोस्ट के मास्टर माइंड से इंटरव्यू भी दिखाया जिसे पूरी मीडिया ने बैन कर दिया था। 

नेशनल मीडिया दिल पर हाथ रखकर हुंकार रैली में आयी 

बेनीवाल की पुराने सभाओं को जो सीकर से भी कई गुना बडी रहा करती थी उन्हें नेशनल मीडिया ने पूरी तरह दरकिनार किया मगर जब  हुंकार रैली सीकर में होनी थी तो उन्हें पता था कि उनकी दोबारा गत पिट सकती है और सीकर टाइम्स के वीडियो फिर कईयों की नौकरी लेंगे। नेशनल मीडिया का हुंकार रैली सीकर को कवर करना उनकी मजबूरी ज़्यादा है और मर्जी कम। 15 लोग अगर कहीं विरोध प्रदर्शन करते हैं तो उसको नेशनल मीडिया के एंकर चीख चिल्लाकर बताते हैं मगर हुंकार रैलियां जहाँ भीड़ लाखों की तादात में होती है उसको एक घंटे का प्राइम टाइम नहीं देना इनको भविष्य में महँगा पड़ेगा  

गरीब पोर्टल ही निष्पक्ष रह सकता है 

सीकर टाइम्स भेदभाव नहीं करता और चाहे भाजपा हो या कांग्रेस, चाहे सुखदेव सिंह गोगामेड़ी हो या हनुमान बेनीवाल, चाहे लाल आतंकियों का आतंक हो या जांबाज़ फौजियों की दास्तान, सीकर टाइम्स निर्भीक है और रहेगा। 
नीचे आप देख सकते हैं कि हज़ारों पत्रकारों की फ़ौज और अरबों खरबों का ताम झाम लिए न्यूज़ मीडिया चैनलों से सीकर टाइम्स TRP में कितना समानांतर है और ये हर कुछ समय बाद नज़र आता है। एक समय ऐसा भी आया है जब सीकर टाइम्स के आगे केवल आजतक था और इंडिया TV,  NDTV ZEE TV सरीखे मीडिया हम से पीछे थे। 

आप भी अभी अपना पोर्टल शुरू करें और निर्भीक रहे 

अगर आप में दम है आप निर्भीक हैं तो आप भी अपना ख़ुद का न्यूज़ पोर्टल शुरू करें, मीडिया देश का और संविधान का चौथा स्तंभ है मगर इसकी दुर्गति इतनी है कि अफ़ग़ानिस्तान के मीडिया को भारत के मीडिया से ज़्यादा ईमानदार माना जाता है। हज़ारों न्यूज़ पोर्टल जब शुरू होंगे तो नैशनल मीडिया को अपनी हद में रहना पड़ेगा और सही ख़बर दिखानी पड़ेगी। 

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