✅जी हाँ हम बात कर रहे राजकीय माध्यमिक विद्यालय डुडवा की 
यह विद्यालय 2002-03 में सेकंडरी स्तर पर कर्मोनन्त हुवा था पर सुविधा नाम मात्र की थी 
कमरों की तो छोड़िए यहा बच्चो के लिए पर्याप्त दर्री पट्टी भी थी नही 
धीरे धीरे विद्यालय स्टाफ ने अपने स्तर पर कोसिस जारी रखी और मूलभूत सुविधायों को जुटाया 
✅सत्र 2015-16 से  विद्यालय में पदस्थापित वरिष्ठ अध्यापक राकेश कुमार ने बताया कि जब मैं यहाँ आया तो देखा कि विद्यालय में बच्चो के लिए कमरे पर्याप्त नही है और भौतिक सुविधाएं तो नाम मात्र की है 
श्री राकेश कुमार ने विद्यालय के प्रधानाध्यापक श्री विद्याधर के साथ मिलकर कार्य योजना बनाई और अपनी टीम के साथ मिलकर @मेहनत इतनी खामोशि से करो कि सफलता शोर मचा दे@ वाली कहावत को चरितार्थ करने की सोची ओर दिन रात मेहनत करके सत्र 2015-16 के बोर्ड परीक्षा परिणाम 100% रखा 
जिससे विद्यालय स्टाफ से ग्रामीण जन काफी प्रभावित हुए और तब  विद्यालय विकास समिति के सामने विद्यालय स्टाफ ने प्रधानाध्यपक के नेतृत्व में अपनी समस्याओं को रखा परन्तु फिर भी कोई उचित समाधान नही हुआ तो गांव वासियो से फिर से आग्रह किया गया ✅अगले सत्र में फिर से विद्यालय के परीक्षा परिणाम उत्क्रस्ट रहा तो ग्राम वासियो ने सरपंच महोदय के नेतृत्व मव स्कूल की सूरत ओर सीरत बदलने की सोची 
तब ग्रामवासियो ने 15 लाख रुपये स्कूल के खाते में जमा करवाये प्रधानध्यापक महोदय ने बिना किसी देरी के उनको मुख्यमंत्री जन सह भागिता योजना के तहत 60 लाख रुपये की स्वीकृति दिलवाई ओर विद्यालय में 5 कमरों के निर्माण कार्य शुरू हुआ  फिर भी कमरों की कमी महसूस हुई तो प्रधानाध्यपक महोदय के आग्रह पर  विद्यालय स्टाफ  के सहयोग से 1 कमरे के निर्माण ओर करवाया गया 
विद्यालय स्टाफ के सहयोग से बच्चो के वाटर कूलर लगवाया गया





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