कठुआ रैली में पीएम मोदी के भाषण की 10 मुख्य बातें


1- घाटी से कश्मीरी पंडितों के विस्थापन के पीछे कांग्रेस की नीतियां थीं। दो परिवारों ने जम्मू-कश्मीर की तीन पीढ़ियों को बर्बाद कर दिया है और राज्य के बेहतर भविष्य के लिए उन्हें सत्ता से बाहर किए जाने की जरूरत है।

2- हम विस्थापित कश्मीरी पंडितों को कश्मीर में उनके पैतृक स्थानों पर बसाने के लिए प्रतिबद्ध हैं और इस दिशा में काम शुरू हो गया है। बारामूला और जम्मू में बड़ी संख्या में मतदान कर आप लोगों ने आतंकवाद के सरगनाओं, अवसरवादियों को मुंह तोड़ जवाब दिया है।

3- कांग्रेस वो पार्टी है जो न्याय दिलाने के नाम पर भी लोगों से धोखा कर जाती है। न्याय के नाम पर पीढ़ी पर पीढ़ी देश के लोगों को धोखा देना, कांग्रेस का राजनीतिक चरित्र है। न्याय का ढोंग करने वाली कांग्रेस, क्या कभी कश्मीरी पंडितों को न्याय दिला पाई? क्या कभी 84 के दंगों में मारे गए सिख भाई-बहनों,बहू-बेटियों को कांग्रेस न्याय दिला पाई।

4-कांग्रेस की नीतियों के चलते ही मेरे कश्मीरी पंडित भाई-बहनों को अपना ही घर छोड़ना पड़ा। कांग्रेस और उसके साथियों को अपने वोटबैंक की इतनी चिंता थी, कि कश्मीरी पंडितों पर होने वाले अत्याचार उन्होंने देखकर भी अनदेखे कर दिए।

5- पहले पाकिस्तान भी न्यूक्लियर की धमकी देता रहता था, इनके न्यूक्लियर की हवा निकली की नहीं। अब ये भी धमकी दे रहें है। बरसों से जो इनके मन में था, चोरी छिपे जिस मसले पर ये काम कर रहे थे वो कहकर सामने आ गया है।  ये जम्मू कश्मीर को भारत से अलग करने, खून खराबे और अलग प्रधानमंत्री बनाने की धमकी दे रहे हैं।

6- श्यामा प्रसाद जी का वो उद्घोष, भारतीय जनता पार्टी के लिए वचनपत्र है, पत्थर की वो लकीर है जिसे कोई मिटा नहीं सकता। ये भाजपा का हमेशा से कमिटमेंट रहा है और देश का ये चौकीदार भी इसी भावना पर अटल है और अटल रहेगा। श्यामा प्रसाद जी का वो उद्घोष, भारतीय जनता पार्टी के लिए वचनपत्र है, पत्थर की वो लकीर है जिसे कोई मिटा नहीं सकता। ये भाजपा का हमेशा से कमिटमेंट रहा है और देश का ये चौकीदार भी इसी भावना पर अटल है और अटल रहेगा।

7- बीते कुछ दिनों में आपने भी देखा कि किस तरह कांग्रेस, नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी की महामिलावट पूरी तरह से एक्सपोज़ हो गई है। बरसों से जो इनके मन में था, जो वो चाहते थे, चोरी छिपे जिसके लिए काम कर रहे थे, वो अब खुलेआम सामने आ गया है।

8- मैं कैप्टन अमरिंदर सिंह को बरसों से जानता हूं। मैं समझ सकता हूं कि इस परिवार भक्ति के लिए उन पर किस तरह दबाव बनाया गया। पंजाब में जिस तरह के दांव पेंच चलाये जा रहे हैं, उसके सामने कैप्टेन को भी झुकना पड़ गया। वे कांग्रेस के नामदार के साथ जलियांवाला बाग गए। लेकिन भारत सरकार के अधिकृत कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति के साथ जाना उन्होंने सही नहीं समझा। यही राष्ट्र भक्ति और परिवार भक्ति का फर्क है।

9-कल उपराष्ट्रपति महोदय सरकार के अधिकृत कार्यक्रम में जलियांवाला बाग शहीदों को श्रद्धांजलि देने वहां गए थे। लेकिन उनके इस कार्यक्रम में कांग्रेस के मुख्यमंत्री गायब थे। उन्होंने इस कार्यक्रम का बहिष्कार इसीलिए किया क्योंकि वो कांग्रेस परिवार की भक्ति में जुटे हुए थे।

10-जम्मू और बारामुला में भारी मतदान कर आपने आतंकियों के आकाओं, पाक परस्तों और निराशा में डूबे महामिलावटियों को कड़ा जवाब दिया है। लेकिन देश में कुछ लोग मोदी के विरोध में इतने डूब गए हैं कि उनको राष्ट्रवाद गाली नज़र आने लगा है। महामिलावटी और उनके रागदरबारी आए दिन सवाल पूछते हैं कि मोदी राष्ट्र रक्षा की बात क्यों करता है।

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