महंगाई की मार के मुख्य कारण सरकार की नीतियां नहीं बिचौलिए है | अगर आप यह नहीं जानते तो हम बता दें कि जो दूध आप 40 से ₹45 प्रति लीटर में खरीदते हैं वह गांव का किसान 17 से ₹18 प्रति लीटर में बिचौलियों को सुपुर्द करता है | सिर्फ 15- 20 किलोमीटर के इस सफ़र में दूध के दाम दुगने से भी ज्यादा बढ़ जाते हैं और उसमें यह भी कोई गारंटी नहीं रहती कि पानी कितना मिलाया गया है | बाजार की बात बताएं तो जान लें कि इस समय ₹15 प्रति किलो के भाव से किसान तूड़ी  खरीद रहा है और दूध ₹17 प्रति लीटर के हिसाब से बेच रहा है | इतना करके किसान को अपनी लागत मूल्य के अलावा मेहनत मजदूरी का पैसा भी नहीं मिल पाता और किसान के नुक्सान का फायदा ग्राहक को नहीं बल्कि बिचौलियों को मिलता है | हमारी टीम ने सीकर के सभी सातों ब्लॉक का मुआयना करा और यह जाना की स्थिति हर जगह एक सी है | दातारामगढ़ के किसान सुरजा राड़ ने बताया कि बिचौलियों ने धाक जमा रखी है और वह किसी को भी ग्राहक से सीधा संपर्क नहीं करने देते | गरीब किसान सिर्फ मेहनत मजदूरी करने के लिए ही रह गया है उधर एक निजी कंपनी में काम करने वाले आनंद चौधरी यह बताते हैं कि ₹35 लीटर से नीचे दूध देने को कोई तैयार ही नहीं होता और इतना किसी के पास समय नहीं है की वह खुद रोजाना 10-15 किलोमीटर दूर से जाकर दूध ले आए |मुनाफे पर अगर नज़र डालें तो एक दूधवाला बिचौलिया 70 से 100 लीटर दूध का प्रतिदिन वितरण करता है और ₹17 प्रति लीटर से लेकर ₹35 प्रति लीटर में बेचने पर उसे प्रतिदिन डेढ़ से ₹2000 की बचत हो जाती है | जितना एक दूधवाला महीने भर में सिर्फ दो चक्कर लगाकर कमा लेता है उतना न तो जी तोड़ मेहनत करने वाला किसान कमाता है और न ही पूरे दिन ऑफिस के चक्कर लगा लगाकर जूते टूटने के बाद नौकरी पेशा लोग कमा पाते हैं | सीकर के युवा इस को अपना प्रोफेशन बना कर, वर्त्तमान बिचौलियों से निचे के भाव में दूध का वितरण कर सकते हैं जिससे उनको कुछ पैसे की भी आमदनी होगी और किसान के साथ साथ ग्राहक का भी भला हो जाएगा | और क्या काम करके आप समाज का भला करते हुए अपनी आमदनी भी बढ़ा सकते हैं उसके बारे में जानने के लिए आप पढ़ते रहिये सीकर टाइम्स

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