बहुत से पाठक इस बात को नहीं जानते कि रोहिंग्या मुसलमान कौन होते हैं और वह भारत के अंदर सरकार के लिए किस प्रकार का सिर दर्द साबित हो रहे हैं। रोहिंग्या मुसलमान म्यांमार से आते हैं और इन को समझने के लिए हम आपको कश्मीर का एक उदाहरण देते हैं। 

मान लीजिए कश्मीर का कोई निवासी पाकिस्तान चले जाएं और वहां पर जाकर शरणार्थी बन जाए और यह अपील करें कि जब तक कश्मीर आजाद नहीं हो जाता तब तक उसे शरणार्थी बनकर रहने दिया जाए क्योंकि उसने कश्मीर में रहते हुए आतंकवाद को अंजाम दिया था और सरकारी कार्यवाही के तहत सरकार ने आतंकवादियों को घेरकर ठिकाने लगाना चालू कर दिया है। इन सब के चलते अब वह भारत में सुरक्षित महसूस नहीं कर रहा और उसे पाकिस्तान में रहने दिया जाए तो साफ तौर पर जिस तरीके का पाकिस्तान का रवैया है वह अपने स्वभाव के अनुरूप कश्मीर के अपराधी, अलगाववादी या आतंकवादी या जो भी कह ले इस उदाहरण में उसे अगर पाकिस्तान रखने को राजी हो जाता है, तो पाकिस्तान अपने स्वभाव को दर्शाता है और इस स्वभाव में पाकिस्तान का भारत के प्रति सम्मान कदापि नहीं झलकता।

अब बात कर लेते हैं प्रधानमंत्री मोदी की म्यांमार यात्रा के तुरंत पहले आए इस बयान पर। ब्रिक्स सम्मेलन के तुरंत बाद प्रधानमंत्री अब मयामार पहुंच गए हैं और पीछे से किरण रिजिजू का यह बयान आया है कि रोहिंग्या मुसलमानों को जो अवैध तरीके से भारत में रह रहे थे उन्हें वापसी का रास्ता दिखाया जाएगा, एक सकारात्मक रुख है भारत के म्यांमार से बढ़ते रिश्ते पर।

हुआ यह था कि मैं मार में एक कट्टरपंथी समुदाय अपना सर उठाने लग गया था जो वहां पर बौद्ध धर्म वालों को निशाना बनाया करता था और उन पर क्रूरता करा करता था। लाखों की संख्या में रोहिंग्या मुसलमानों ने अपने ही देश में रह रहे अपने ही देशवासियों को जो बौद्ध धर्म के अनुयाई थे उनको चुन-चुनकर मारना शुरू किया, और रोहिंग्या मुसलमानों के अनुसार वह म्यांमार को मुक्त कराना चाहते थे और साथ ही दूसरे धर्म के अनुयायियों को खत्म करना चाहते थे इसके चलते वहां की सरकार को सेना के साथ मिलकर अभियान चलाना पड़ा जिसमें सेना ने रोहिंग्या मुसलमानों को उन्ही की भाषा में जवाब दिया इन सबके बीच ऐसे रोहिंग्या मुसलमान जो इंसान में और धार्मिक कट्टरता में विश्वास नहीं रखते थे उन्होंने यूनाइटेड नेशन के द्वारा भारत में लॉन्ग टर्म वीजा के लिए अप्लाई किया जो भारत के संविधान के अनुसार 5 साल तक दिया जा सकता है। 

भारत सरकार ने 14000 रोहिंग्या मुसलमानों को लॉन्ग टर्म वीजा मुहैया कराया और साथ ही 40000 मुसलमान अवैध रूप से घुसपैठ करके भारत की सीमा में सीधा म्यांमार से या बांग्लादेश होते हुए घुस गए।

आज जो बयान सामने आया है वह इन 40000 मुसलमानों के लिए आया है जिसको सभी मीडिया वाले बढ़-चढ़कर दिखा रहे हैं मगर भाजपा के प्रवक्ता ने यह साफ कर दिया है कि सरकारी फरमान में कहीं पर भी रोहिंग्या मुसलमानों का जिक्र नहीं है बल्कि उन तमाम अवैध रूप से रह रहे घुसपैठियों का हैं जो संविधान का मजाक उड़ा रहे हैं और देश में अवैध रूप से रह रहे हैं

बता दें कि बिहार में बोधगया में हुए बम ब्लास्ट में भी रोहिंग्या मुसलमानों का हाथ था और बुद्ध धर्म के लोग उनके निशाने पर थे। सरकार ने कदम उठाया है ताकि म्यांमार की धार्मिक लड़ाई भारत में प्रवेश ना करें और यहां की व्यवस्था को किसी प्रकार की क्षति ना पहुंचाएं साथ ही दूसरी और म्यांमार से बढ़ते हुए रिश्तो के लिए भी इस कदम को विदेशी मीडिया एक बड़ा कदम बता रहे हैं मगर टीएमसी के प्रवक्ता इस सवाल को साफ बचा जाते हैं और इस पर खुलकर अपनी राय देने से बच रहे हैं। जब बात संविधान के अनुरूप हो रही कार्यवाही की है तो इस प्रकार बचना साफ तौर पर तुष्टिकरण प्रस्तुत करता है, जो राजनीति के लिए एवं संविधान के लिए घातक है

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