नहीं थम रहा किसानो की मौत का सिलसिला, कर्ज के तले, बेटियों की शादी न कर पाने, बिमारी से परेशान हजारों किसान इस वर्ष भी लगा चुके मौत को गले | मगर ये किसान बड़े कलाकार नहीं हैं जो संपन्न हैं, जिनकी फिल्मों के करोड़ों के विज्ञापन टीवी को मिलते हैं इसलिए फ़िलहाल टीवी किसी कलाकार के मौत पर घडियाली आंसू रोकर ये जता रहा है कि हाँ विज्ञापन देने वाले परिवार के सदस्य की मौत पर हमें बहुत खेद है, दुःख है मगर इस दुःख में हम अपना कर्त्तव्य निभा रहे हैं

क्या हर फ़िल्मी कलाकार की मौत पर टीवी रोता है ?

आपको भी पता है कि अगर कलाकार हजारों की संख्या में हैं तो मौत भी हजारों की संख्या में होती होगी मगर बड़ा सवाल ये है कि सिर्फ उन फिल्मो के कलाकारों के ही इंटरव्यू टीवी पर क्यूँ आते हैं जिनके विज्ञापन उसी टीवी या पत्र पत्रिका पर पैसे देकर खरीदे जाते हैं

करनी सेना बनाम मीडिया द्वन्द में दिखे सबूत

सबूत के साथ आपने देखा कि कैसे सभी मीडिया हाउस जिनको हजारों करोड़ के विज्ञापन मिले हुए थे वो पूरी ताकत से स्कूल बस को बचाकर निकालने वाली खबर को स्कूल बस पर पथराव की तरह दिखा रहे थे और तुरंत उनको ज्यादा विज्ञापन देकर फिल्म निर्देशक ने हिसाब में पक्का होने का भी सबूत मिल गया

एक ऐसी फिल्म का नाम बताइए जिसका विज्ञापन नहीं आया हो और उसके कलाकारों का टीवी पर इंटरव्यू आ गया हो

ये प्रश्न अभी तक भी आपके जेहन में नहीं आया है और इसको अब खुदसे पूछो कि अगर कोई फिल्म विज्ञापन नहीं देखा तो क्या उस फिल्म के किसी कलाकार का इंटरव्यू आपने देखा है ? ये प्रश्न कोई मीडिया हाउस इसलिए नहीं उठाता क्यूंकि सब एक ही हमाम में नंगे नहा रहे हैं

सीकर वासियों और सीकर टाइम्स में है आग

बार बार सीकर ने ये दिखा दिया है कि सीकर वासियों को अगर ऐसे प्रश्नों का सामना पड़े जो वो पहले कभी सोच भी नहीं पाए हैं तो वो न सिर्फ ऐसे प्रश्नों का डटकर सामना करते हैं बल्कि उससे भी तीखे प्रश्न खड़े कर देते हैं जो आने वाले समय और मीडिया कवरेज को ही बदल के रख देता है इसलिए ही सीकर को क्रांति की राजधानी कहा जाता है


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