प्रधान मंत्री के शेखावाटी आने के कुछ दिन बचे हैं ऐसे में पूरे शेखावाटी में उत्साह है | नरेन्द्र मोदी उन गिने चुने नेताओं में हैं जो अपनी फुर्ती की वजह से हर जगह का ख़याल रख पाते हैं और इन्ही वजहों से शेखावाटी के भी मनपसंद नेता हैं |

कान सिंह मिले प्रधान मंत्री से 

सीकर में अनेक नागरिक किसानी, कला एवं अलग अलग क्षेत्रों में सराहनीय कार्य के सम्मान में  प्रधानमंत्री द्वारा बुलाये जाते रहे हैं इसी क्रम में कान सिंह निर्वान ने गत बीस फ़रवरी को मोदीजी से मिलते हुए उन्हें किसानी आय को डेढ़ गुनी नहीं बल्कि दो गुने करने की चर्चा की जिसे प्रधान मंत्री ने काफी गंभीरता से लेते हुए बताया कि वो अपने प्लान में जुटे हुए हैं और जैसे जैसे मुमकिन होता जाएगा वैसे वैसे किसानी आय बढती जायेगी

सत्तर साल में कम से कमतर होती गई किसानी आय 

अगर थोडा पीछे जाते हैं तो देख सकते हैं कि देश जैसे जैसे आगे बढ़ा, किसानी वैसे वैसे पीछे चली गई और देश के आजाद होने के सत्तर साल बाद किसानो की आत्महत्या करने की दर बढती चली गई आखिर इसका जिम्मेदार किसे समझा जाए? क्या किसान खर्चा ज्यादा करने लग गए या फिर सरकारी नीति ही किसान के विरुद्ध हो गई जिसमें सिर्फ व्यापारियों और शहरों के लिए ही स्थान था

आठ मार्च को आ रहे हैं मोदी, पूर्वोत्तर फ़तेह करके 

जहाँ भाजपा को जमीन नहीं मिल रही थी उसी पूर्वोत्तर में दमदार सरकारी नीतियों और चीन को कदम कदम पर भारत की शक्ति का एहसास करवाने की जो सफल कोशिश पिछले दिनों देखने को मिली है पूर्वोत्तर उसका मुरीद हो गया और भाजपा को इतना भारी समर्थन मिला जिसकी उम्मीद बाकी भारत के चुनाव विशेषज्ञ भी नहीं लगा रहे थे इसलिए इस जीत को भी मोदी की ही जीत की तरह देखा जा रहा है

स्वामीनाथन आयोग कांग्रेस के दौरान बना था मगर कांग्रेस ने कभी नहीं मानी बात

ऐसा भी देश ने देखा कि जो सरकार आयोग बना रही है वो अपने ही आयोग की कोई बात नहीं मान रही और हाल ही में आई हुई सरकार को किसानो की स्थिति के लिए कोस रही है, इतने सालों में किसान की जो हालत ख़राब हुई है उसको वापस पटरी में लौटा लेने के लिए काफी समय चाहिए और आधार कार्ड से लिंक करवाकर, भामाशाह योजना के द्वारा एक पैसे का भी भ्रष्टाचार नहीं होने देने के लिए मोदी सरकार ने जो कार्य किया है वो बीते कई सरकारों से बढ़कर आँका जा रहा है

क्या प्रधान मंत्री राजनीती के लिए आ रहे हैं

चाहे राजनीती के लिए ही आ रहे हों मगर शेखावाटी के युवा इस बात के चलते काफी खुश हैं कि प्रधानमंत्री उनसे इतने दूर नहीं हैं कि उनके क्षेत्र में ही न आयें, पहले कई प्रधानमंत्री आये और गए मगर इतनी तीव्र गति से आने वाले प्रधानमंत्री जन सामान्य की पसंद बन चुके हैं जिसके चलते लाखों की भीड़ जुटने की संभावना जताई जा रही है 

किसान आन्दोलन की राजधानी है शेखावाटी 

अगर शेखावाटी का किसान खुश नहीं है तो वो आन्दोलन करता है जिसकी गूँज इतनी तेज़ होती है जो विधानसभा से लोकसभा तक सुनाई देती है | हाल ही में अहिंसावादी किसान आन्दोलन के बाद सरकार ने पचास पचास हज़ार के सहकारी कर्ज जो माफ़ किये हैं वो शेखावाटी के किसानो की जीत है जिसको पूरे राजस्थान के किसान सलाम कर रहे हैं साथ ही अगर प्रधानमंत्री बड़ी घोषणा कर देते हैं तो ये सोने पे सुहागा हो जाएगा 

क्या प्रधानमंत्री कोई बड़ी घोषणा कर सकते हैं 

समर्थन मूल्य निर्धारित करना को कुछ लोग बड़ा मान सकते हैं, मगर बड़ी घोषणा वही होगी जो समर्थन मूल्य से कम की खरीद पर खरीददार को अपराध की श्रेणी में ले आये | ऐसी बड़ी घोषणा के लिए अकेले प्रधानमंत्री कोई घोषणा नहीं कर सकते बल्कि संसद कि सहमति लेनी होती है | फिर भी इसका अगर एलान मोदी कर देते हैं तो उनके समर्थन में किसान परिवारों का सैलाब उमड़ पड़ेगा | ये सोच परी कथाओं जैसी भले ही लगती हो मगर मोदी का जो व्यक्तित्व है उनसे देशवासी हमेशा करिश्मे की उम्मीद में रहते हैं जो देश के प्रधानमंत्री से रहनी भी चाहिए |

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