जयपुर: 19 सितंबर को वीर तेजाजी बलिदान दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित भव्य आयोजन “जाट गौरव मार्च” को ब्लैकआउट करने और ख़बर न छापने से बुरी तरह नाराज़ आदर्श जाट महासभा के प्रदेश अध्यक्ष राम नारायण चौधरी ने एक दैनिक अख़बार की प्रतियां जलाई व समाज से ऐसे पक्षपाती अख़बार के बहिष्कार करने की अपील जारी की। 
क्या था प्रोग्राम?
राष्ट्रीय स्तर का "जाट गौरव मार्च" जिसमे 25 जाट महापुरुषों की झांकियां थी जिनके सम्मान में 11 राज्यों के जाटों ने भाग लेकर पुष्प वर्षा की।देश व समाज के गौरव बबिता फोगाट,अन्तराष्ट्रीय शूटर दादी चन्द्रों तोमर,एशियन गेम्स रजत पदक विजेता लक्ष्य श्योराण ने गौरव मार्च का गौरव बढ़ाया।
यह विशिष्टगण भी पहुंचे थे 
पूर्व केंद्रीय मंत्री लालचंद कटारिया,संसदीय सचिव भेराराम सियोल विधायक ओसियां ,डॉ सुनील गरसा व समाज के कई संगठनों के पदाधिकारियों ने भाग लिया लेकिन चौधरी के अनुसार अफसोस इस बात का रहा कि देश का गौरव बढ़ाने वाली,देश के लिये सबसे अधिक शहादत देने वाली व देश में अन्न के भंडार भरने वाली जाट कौम के लिये अखबार ने न्यूज देना उचित नहीं समझा।
जातिगत भेदभाव का लगाया आरोप
रामनारायण चौधरी का यह भी कहना है कि उन्हें परेशानी इस बात की है कि एक जाति विशेष के छोटे से छोटे कार्यक्रम पर भी बड़ी ख़बर चलाने वाले अख़बार ने इतने बड़े और भव्य आयोजन की एक कॉलम तक में जगह नहीं देखकर अपने पक्षपाती रवैये को सार्वजनिक कर दिया है साथ ही उन्होंने यह कहा समाज की ख़बर का बहिष्कार करने वाले अख़बार का अगर समाज ने बहिष्कार नहीं किया था तो यह घातक होगा। 
प्रतिभाओं को छोटा दर्शाकर न्यूज देने का भी आरोप
 उनका यह भी आरोप है कि उनके समाज के किसी प्रतिभावान को जब भी कोई अवार्ड या सम्मान मिलता है तो पक्षपाती अख़बार जान बूझ कर उसकी ख़बर नहीं चलने देता और यदि ख़बर चलाने ही पड़ जाए क्योंकि सोशल मीडिया पर पहले ही बड़ी ख़बर बन चुकी होती है तो जान बूझकर यह दैनिक अख़बार उसके आगे से समाज का नाम हटा देता है जिससे यह पता न पड़े कि वो किस गौरवशाली समाज से ताल्लुक रखता है। 
गलत खबरों में जानबूझकर देते हैं समाज का नाम
रामनारायण चौधरी का यह भी आरोप है कि अगर समाज के किसी भी  व्यक्ति ने कोई ग़लत काम किया होता है जो उसे नहीं करना चाहिए तो यही अख़बार विशेषकर उसकी जाति व समाज का नाम छापता है जबकि कई मामलों में यह साफ़ दिखा है कि वह व्यक्ति के डॉक्यूमेंट्स में उसमें अपने समाज का नाम नहीं लगा रखा होता। 
मीडिया के पक्षपाती रवैये का कारण यह बताया
चौधरी यह कहते हैं कि इसका मुख्य कारण ज़्यादातर मीडिया समूहों में न्यूज निर्धारण करने वाली टेबलों पर एक विशेष जाति का एकाधिकार होना है। 















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