विधान सभा चुनाव में कांग्रेस की कई सीटें RLP की वजह से फंस गई और कम से कम बारह सीटों का नुक्सान हुआ, भाजपा के खिलाफ वोटों को बेनीवाल कांग्रेस में जाने देने के बजाय RLP की तरफ ले जाने में कामयाब हुआ जिसकी परोक्ष रूप से कांग्रेस नेता भी मानते हैं मगर गठबंधन के बाद मामला बदल गया है

त्रिकोणीय मुकाबले के बजाय आमने सामने आ गई 7 सीटें 

मात्र आधे प्रतिशत के अंतर से भाजपा बाहर बैठी और कांग्रेस ने बमुश्किल सरकार बनाई, अगर ये फैसला दो प्रतिशत का होता तो बारह से ज्यादा सीटें बढ़ सकती थी | विशेषज्ञों की राय में ढाई प्रतिशत वोट जो RLP के खाते में गया वो दो तिहाई कांग्रेस की तरफ जाने वाला ही था, इतना ही नहीं  विधान सभा चुनाव के दौरान, अगर राज्य में RLP का बसपा से गठबंधन हो जाता तो कांग्रेस सरकार नहीं बना पाती और गणित पेचीदा हो जाती मगर वो तब की बात थी जब बेनीवाल की पार्टी को तीसरा विकल्प मानकर कुछ प्रतिशत वोट इधर से उधर हो रहे थे | लोकसभा की सात सीटें पर इस बार भी उसी प्रतिशत का फेर लगा सकती थी मगर लगता है अब ऐसा नहीं होगा क्यूंकि वोटर RLP को बीजेपी ही मानकर अपना मत देंगे और इसके चलते कुछ प्रतिशत वोट जो भाजपा से असहमत था वो डाइवर्ट होने के बजाय सीधा कांग्रेस के हिस्से जा सकता है

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