सरकार का जबसे ये निर्णय आया है कि अब कोरेक्स बेन कर दी जायेगी तो मेडिकल वाले कुछ समय के लिए अफ़सोस में डूब गए थे कि बचे हुए माल को वापस ही करना पड़ेगा मगर नशेड़ियों ने उनकी ये समस्या काफी हद तक समाप्त कर दी |
एस के अस्पताल के आगे हमने कई मीडियल पर संपर्क करा तो उन्होंने बताया कि लोग भर भर के कोरेक्स करीदने की कोशिश में लगे हुए हैं और कहीं कहीं से पर्चियां बनवा कर ला रहे हैं | इस समय ऐसा कोई तरीका नहीं है कि डोक्टर कि लिखी हुई सही और फर्जी पर्चियों का पता लगाया जा सके और अगर हो भी तो भी कोई फरक नहीं पड़ता | यहाँ के मेडिकल वाले वैसे भी कौन से रसीद देते हैं, यकीन न हो तो लम्बी साड़ी दवाइयां लिखवा कर चले जाओ किसी भी दूकान पर और जब फार्मासिस्ट लिफाफे में दवाइयां डाल दे तो देख लेना वो पक्की रसीद देता है या कच्चे कागज पर जोड़ घटा कर पैसे बता देता है और आपको बिना पक्की रसीद के ही दवाइयां थमा देता है |
अगर कोई मेडिकल वाला ये पोस्ट पढ़ रहा है और वो कह रहा है कि उसने कभी ये काम नहीं किया तो हम अपने आदमी को छुपा केमरा लेकर भेज देंगे और बता देंगे कि इस हमाम में कितने नंगे हैं | कानून व्यवस्था तो काले धन की तरह हो गई है, जिसकी बात तो सभी करते हैं मगर वो है कहाँ इसका किसी को पता नहीं है | काला धन इन्ही पर्चियों के मायाजाल में छुपा हुआ है ये भी हम आपको बता देते हैं, मगर ये पोस्ट काले धन के बारे में नहीं है इसलिए मुद्दे पर लौट आते हैं |
भारत सरकार ने 35 साल से चल रही Vicks Action 500 को भी बेन कर दिया है और ये बताया है कि इससे सेहत पर बुरा प्रभाव पड़ता है | इसका मतलब जाने कितने मरीज शमशान और कब्रिस्तान पहुँच गए हैं पिछले 35 सालों में और सरकार अब बता रही है कि शायद उन्होंने ये दवाई ली हो जिससे उनकी सेहत और सेहत की वजह से उमर कम हो गई हो | ये सब क्या और क्यूँ हो रहा है इसके बारे में डाक्टरों से जांच पड़ताल करके बताएँगे मगर अभी हमारी समझ में इतनी बात ही आ रही है कि होली आने वाली है और कोरेक्स अभी तो बिक ही रही है | आप पढ़ते रहिये सीकर टाइम्स 

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