सीकर समेत भारत के रेबीज से मरने वाले लोगों पर अगर नज़र डालें तो पता पड़ता है कि बीस हज़ार से ज्यादा लोग हर साल आवारा कुत्ते के द्वारा काटे जाने पर रेबीज से मर जाते हैं और इसपर कोई भी सरकार ध्यान ही नहीं देती | रेबीज एक जानलेवा बीमारी है जिसका अगर संक्रमित कुत्ते के काटने के चौबीस घंटे में इलाज चालू न करा जाए तो ठीक होने की कोई गौरंती नहीं होती |
ये पता करना व्यवहारिक रूप से असंभव है कि हर उस कुत्ते का पता पड़ जाए जो रेबीज से ग्रसित है | सबसे ज्यादा खतरा इससे बच्चो को होता है क्यूंकि ज्यदातरह केसो में वो अपने घर में बड़ो को बताते ही नहीं हैं कि उनको कुत्ते ने खंरोच लिया है या काट लिया है क्यूंकि ऐसा करने पर बच्चों को डर रहता है कि कहीं उनकी पिटाई ही न हो जाए | अभिभावकों को चाहिए कि अपने बच्चों को प्यार से ट्रेन करें कि आवारा कुत्तों से कैसे बचना है और अगर कुत्ता काटे या खंरोचे तो बच्चों को क्यों अपने माँ बाप को इसकी तुरंत सूचना देनी है |
आवारा कुत्तों का मसला सरकार के लिए वोट बैंक नहीं है अन्यथा इसपर कोई दूसरी पार्टी आन्दोलन ही कर देती और संसद में भी कोई न कोई सोया हुआ विधायक जागकर इसके बारे में ध्यान आकर्षित करता |
पिछले पांच साल में आतंकवाद की वजह से जितने लोग मारे गए हैं उनसे कई सौ गुना तो रेबीज से संक्रमित आवारा कुत्तों के हाथों मौत के घाट उतार दिए गए हैं इस लिए ये आवारा कुत्ते असल मायने में रेबीज के बायोलॉजिकल हथियार के साथ बड़े वाले आतंकवादी हैं |
काटने के अलावा जब आप अपनी बाइक या कार से कहीं जा रहे हों तो ये कुत्ते अचानक से कहीं से भी प्रकट हो जाते हैं और भयंकर रूप से गरजते हुए आपके पीछे हो लेते हैं जैसे आप इनकी गाड़ी चुरा कर ले जा रहे हों | ऐसे में आये दिन दुर्घटना होती रहती है | जेंट्स तो फिर भी कण्ट्रोल कर लेते हैं मगर लेडीज चालक ज्यादा घबरा जाती हैं | पिछले हफ्ते ही पिपराली रोड पर एक लेडीज का स्कूटर एक जूस वाले की दुकान में घुस गया था जिसकी वजह से लेडीज को भी और वहां बैठे लोगों को भी चोटें आई थी मगर आतंकवादी कुत्ता आराम से रुक गया और दूसरी स्कूटी का पीछा करने लगा |

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