हर जगह Oppo और विवो के विज्ञापनों से सीकर शहर अटा पड़ा है अभी कुछ ही समय पहले तक इनमें से एक भी बैनर दिखाई नहीं देता था मगर अचानक से इतने सारे विज्ञापनों को देखना सीकर वासियों को भी आश्चर्यचकित करता है आज हम आपको बताएंगे कि ओप्पो और विवो का मार्केट प्लान क्या है और किस प्रकार इन विज्ञापनों के पैसे आपकी जेब से लगते हैं

सबसे पहले आपके लिए यह जानना जरूरी है कि यह दोनो कंपनियां परस्पर कंपटीशन नहीं करती हैं बल्कि इन दोनों कंपनियों का मालिक एक ही है और एक ही मालिक ने दो कंपनियां इसलिए बनाई है ताकि इन दोनों में ही ग्राहक कंपटीशन करके दोनों में से कोई एक खरीदें यानी चित भी मेरी पट भी मेरी। इसे मार्केटिंग की शब्दावली में कंप्लीट डोमिनेंट कहते हैं

अब जरा यह भी जान लीजिए कि कोई भी दुकानदार आपको Oppo और विवो के सेट बेचने में इतनी जान क्यों लगा देता है ऐसा क्यों होता है कि दुकानदार सिर्फ और सिर्फ Oppo और वीबो को ही दूसरी दुनिया से आया हुआ गैजेट बताकर बाकी सब को बेकार बताने में लगा रहता है। इतना मुश्किल नहीं है जानना कि इन सब के पीछे हर हैंडसेट पर मिलने वाला मार्जिन यानी प्रॉफिट ही जिम्मेदार है

जहां Samsung और Nokia जैसे मोबाइल  दुकानदार के पास में 5 से आठ परसेंट का मार्जिन ही रहता है वहीं Oppo और विवो पर प्रत्येक सेट पर 16 से 24 परसेंट तक का मार्जिन दिया जाता है यानी 10000 के माल पर कभी-कभी ढाई हजार तक दुकानदार भाई की जेब में जाते हैं वही सैमसंग के ₹10000 का सेट बेचने पर ₹500 तक ही दुकानदार भाई को मिल पाते हैं।

ज्यादातर ग्राहक इधर-उधर एडवर्टाइजमेंट को देखकर कंपनी की प्रतिष्ठा का अंदाजा लगाते हैं और दुकानदार से जाकर कभी नहीं पूछते कि उसकी मोबाइल में महंगा स्नैपड्रैगन का प्रोसेसर लगा है या थोक के भाव मिलने वाला मीडियाटेक का सस्ता प्रोसेसर। इसके साथ ही मोबाइल में लगने वाली रेम डी डी आर 2 है या डीडीआर 3 इसके बारे में कोई जानकारी नहीं लेते और ना ही दुकानदार इस बारे में ग्राहक को कोई जानकारी देकर अपना मार्जिन कम करना चाहता है

इन कंपनियों के मिलने वाले फोन दूसरी कंपनी के ₹6000 में मिलने वाले फोन के सामने भी ज्यादातर मामलों में टिक नहीं पाते मगर हर जगह लगे विज्ञापन और दुकानदार के जबरदस्त जोर लगाने की वजह से ज्यादातर लोगों के हाथ में इस समय इन्हीं दोनों में से एक का मोबाइल है

यह भी जान ले कि इन दोनों के अलावा एक और मोबाइल यानी वनप्लस भी इसी कंपनी के मालिक का है यानी ब्रांड तीन अलग-अलग मगर कंपनी एक ही है

Oppo और विवो के बड़े-बड़े बैनर काफी महंगे दिये जाते हैं बस स्टैंड के आसपास में लगे हुए बैनरों के प्रतिमाह 5000 से₹15000 तक दिए जाते हैं और यह सारा पैसा ग्राहक ही देता है कैसे ना कैसे।

तो अगली बार जब भी आप मोबाइल लेने जाए तो यह ध्यान जरूर रखें कि उसमें प्रोसेसर अच्छी कंपनी का लगा है या किलो के भाव मिलने वाला और अन्य कलपुर्जे के बारे में भी थोड़ा ज्ञान बढ़ाएं और अपने काफी सारे पैसे बचाएं।

प्रोसेसर के बारे में अगर आप नहीं समझते तो मोटे तौर पर समझा देते हैं कि लैपटॉप भी एक से दिखने वाले अलग अलग प्रोसेसर के होते हैं जहां आई3 वाला लैपटॉप 20 से 25 हजार में मिल जाता है वहीं ऐसा का ऐसा दिखने वाला लैपटॉप जिसमें आई7 का प्रोसेसर लगा हो वह ₹50000 तक का आता है।
तो बेवकूफ ना बनाएं अपना दिमाग लगाएं और अपने दोस्तों को भी बताएं क्योंकि यह बात आप ने सीकर टाइम्स पर जानी है।

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