अभी दो ही दिन पहले हमने ये रिपोर्ट दी थी कि कैसे एक सरपंच ग्राम पंचायत का पैसा अपने निजी उपयोग के कार्य में लगा रहा था और ग्राम वासिओ की सतर्कता ने मामले को ऊपर पहुंचकर उसको अयोग्य घोषित करवा दिया और साथ ही बना ग्राम वासिओ की सतर्कता का बड़ा उदहारण, अब आगे पढ़िए ये रिपोर्ट 
जनसाधारण का यह मानना रहता है कि शहरों के लिए सरकार बहुत खर्चा करती है मगर गांव के लिए धेली नहीं देती तो आपकी इस शिकायत का निराकरण करने हम दे रहे हैं नीचे एक लिंक जिस पर क्लिक करके आप जान पाएंगे कि आपकी ग्राम पंचायत को पिछले साल और उसके पिछले साल कितने लाख या करोड़ रुपए दिए गए हैं और आप जान पाएंगे कि आपकी ग्राम पंचायत या आपके घर के नजदीक कितना सरकारी पैसा बहा है जिसको आप देख ही नहीं पाए हैं  ना हम यहां पर कोई अनुमान लगा रहे हैं ना ही आपसे लगवा रहे हैं हम आपको बता रहे हैं सीधा सच जो डिजिटल इंडिया की वजह से आपके सामने सरकार खुद लेकर आ रही है, मगर अभी तक आप उसको इस्तेमाल ही नहीं कर रहे थे। तो सवाल के पैदा होता है कि इस लिंक को जो हम आपको दे रहे हैं उस पर जाकर आप पता तो कर पाएंगे कि प्रत्येक योजना पर कितना पैसा खर्चा हुआ है मगर उसके बाद अगर आपको लगे कि पैसा खर्च होने के बराबर तो काम ही नहीं हुआ है तो उस स्थिति में आपको क्या करना है। 

इस सवाल का जवाब हम जल्द ही देंगे आपको मगर पहले आप लिंक को क्लिक करें और लिस्ट बनाएं अपने आसपास घूमे और जाकर मुआयना करें कि सरकार जो पैसा जारी करती है ग्राम पंचायतों के लिए और उस पैसे को जो आपका सरपंच खर्च करता है, आप ही के विकास के लिए क्या उस जारी करे गए पैसे और खर्च करे गए पैसे में आपको सरपंच की इमानदारी दिखती है या दिखता है कुछ और। पढ़ते रहिए सीकर टाइम्स क्योंकि जो खबर हमारे पास है वह किसी और के पास नहीं

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