मार्क्स कहते हैं "Religion is Opium of The People" यानि धर्म अफीम है लोगों का इसको चीन ने शिनजियां में लागू भी कर दिया है, देखें नीचे विडियो
अब सवाल ये उठता है कि अमराराम गौ रक्षकों के खिलाफ खुलकर बयान देते हैं मगर चीन जो दमनकारी नीति दिखा रहा है एक धर्म के मासूम लोगों के प्रति उसके बारे में नहीं बोलते उलटे अपनी सभाओं में बार बार चीन से प्रेरणा लेने और गाते बजाते आन्दोलन करने की तारीफ करते हुए ही नहीं थकते | ये दोहरा मापदंड क्यूँ दर्शाते हैं, क्या चीन के सभी गुनाह सिर्फ इसलिए माफ़ कर देने चाहिए क्यूंकि वो एक कम्युनिस्ट देश है, क्या मार्क्स के विचार से सहमत हैं अमराराम और उनके सभी समर्थक?

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