किसान की पीड़ा सिर्फ किसान जानता है और उसपर राजनीती की रोटियां सेंकने वालों को शर्म आनी चाहिए | वर्त्तमान समय में हर राजनेतिक दल ने दुसरे दलों का विरोध करने के लिए किसान नाम का राजनैतिक हथियार विकसित कर लिया है मगर असली किसान अभी तक अपने लिए कोई गैर राजनितिक संस्था क्यूँ नहीं बना पाया जो एक पार्टी विशेष के खिलाफ कभी नहीं बोलता :

जो सवाल कोई नहीं पूछ रहा वो हम पूछ रहे हैं 

1. आल इंडिया किसान सभा ने इतिहास में कितनी बार माकपा शासित राज्यों की सरकारों के खिलाफ आन्दोलन किये 
2 वर्त्तमान में केरल में माकपा की सरकार है क्या वहां किसान आत्महत्या नहीं कर रहा ? उसकी सुध AIKS क्यूँ नहीं लेती ?
3 किसान नेताओं के परिवारों के अनाज मंडी में खुदकी दुकानें हैं, उन्होंने कब कब और कितना अनाज समर्थन मूल्य से ऊपर लिया 
4 कितनी बार अनाज मंडी में पकड़ रखने वाले किसान नेताओं ने बाकी व्यापारिओं को बाध्य किया कि वो समर्थन मूल्य पर अनाज खरीदें?
5 कितनी बार किसान नेताओं ने सरकारों के नहीं व्यापारियों के खिलाफ घेराबंदी की और कम मूल्य पर माल खरीदने वाले के खिलाफ कार्यवाही की या बहिष्कार किया ?
6 प्याज, टमाटर के भाव सरकार की नीति की वजह से तय होते हैं या व्यापारियों की नीति से ? उनसे निपटने के लिए अभी तक किसान सभा ने क्या किया ?
7हरे रंग और सफ़ेद रंग के किसान संगठन लाल रंग के साथ क्यूँ नहीं दिखे, और लाल वाले दूसरों को सहयोग क्यूँ नहीं करते ?

अगर आपने इन् सवालों को कभी नहीं पुछा तो आप किसान हैं ही नहीं सिर्फ दिखावा करते हैं 

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