महिला दिवस हो और प्रधानमंत्री क्षेत्र में आ रहे हों इससे बढिए क्षेत्र के लोगों को क्या चाहिए कि सभी के ऊपर उनके क्षेत्र को मिली हो वरीयता मगर कुछ आन्दोलनकारियों को ये बात पसंद नहीं आई और उन्होंने करीब सौ से कुछ ज्यादा की टोली बनाई जिनमें एक भी महिला नहीं आई और सुर्खियाँ बनने की नाकाम कोशिश की जिसका विरोध सिर्फ फोटो और एक दो विडियो तक ही सीमित रहा

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर प्रधानमंत्री आये शेखावाटी 

सीकर से लेकर झुंझुनू तक गाड़ियों की लाइन लग गई और सब पर भाजपा के झंडे और पूरे रस्ते नारे गूँज रहे थे भारत माता की जय और वन्दे मातरम् ऐसे में माहौल उत्साह से भर उठा |

विरोध के लिए विरोध पर बैठे मुट्ठी भर आन्दोलनकारी 

किसान सभा के आन्दोलनकारी जिनके नेता अमराराम कल ही जिस भाजपा सरकार की वर्त्तमान मुख्यमंत्री है उनसे अवार्ड लेकर घर वापस लौटे हैं और आज प्रदर्शन कर रहे हैं | ज्ञात रहे कुछ समय पूर्व बिहार चुनाव के समय कई सामानांतर विचारधाराओं के अग्रिणी नागरिकों ने अवार्ड वापसी की मुहीम चलायी थी जिसमें लेफ्ट की विचारधारा का असर होने के आरोप भी लगे थे

महिला दिवस पर विरोध क्यूँ?

सभी ये देखकर हैरान थे कि आखिर महिलाओं से आन्दोलनकारियों को क्यूँ बैर है, उनके प्रदर्शन में एक भी महिला नहीं थी इसपर उनकी मानसिकता पर कई सवाल उठ रहे हैं, सभी जानते हैं कि गाँव में ज्यदातारह गाय भैंस से लेकर खेती में और चूल्हा चौका तक में महिलाएं अपना सब कुछ झोंक देती हैं मगर कुछ पुरुष सिर्फ पंचायत घर के आस पास बैठकर समय बर्बाद करते हैं और ऊपर से महिलाओं को दुसरे दर्जे के नागरिक की तरह बर्ताव करते हैं



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