तमिल नाडू के टूटीकोरिन में हज़ारों लोग सड़क पर उतरे और उनके विरोध प्रदर्शन को पुलिस ने कुचलने के दौरान गोलीबारी का सहारा लिया जिसमें 10 नागरिकों की मौत हो गई और इतना सब होने के बाद भी NDTV ख़ामोश है, कारण जानिये
✅NDTV के मालिक का है बड़ा हिस्सा स्कटरलाईट कम्पनी में
रवीश जैसे पत्रकार तभी चुप हो जाते हैं जब उनके मालिक का हिस्सा ऐसी कंपनियों में निकल आता है, सारी नैतिकता को लंबी छुट्टी पर भेज दिया रवीश ने क्योंकि प्रणय रॉय का बहुत बड़ा हिस्सा कम्पनी में लगा हुआ है इसलिए तो इतनी बड़ी घटना हो जाने पर भी NDTV ने अपना मुँह बंद रखा और रविश ने अपनी दलाल पत्रकारिता जारी रखी। रवीश कुमार ने बेबाक़ और निर्भीक होने का पब्लिक परसेप्शन खो दिया जिसको पत्रकार तो पहले ही जानते थे कि दिखावा है। अशफाक हो या गौरी लंकेश रवीश ने TV को काला टीवी घोषित कर दिया था जिसको देख हम भी इन्सपायर हुऐ थे बाद मे पता चला कि कॉपीराईट से बचने के लिए काला किया था बहरूपिये ने।  दस आम नागरिकों  को उसके मालिक की कंपनी के ख़िलाफ़ हो रहे आंदोलन में  पुलिस ने मौत के घाट उतार दिया और रवीश के कान पर जूं नहीं रेंगी। 
✅कांग्रेस ने क्या किया मौतों के विरोध में?
पहले दिन ग़ुलाम नबी आज़ाद में बहुत दबंग आवाज़ में घटना को जलियावाला बाग़ से कम्पेयर कर दिया था मगर अगले ही दिन उनकी बत्ती गुल हो गई क्योंकि उसमें चिदंबरम का भी हिस्सा था जो बाद में चिदंबरम ने बेच दिया था मगर चिदंबरम ने NDTV के मालिक के साथ मिलकर कई गेम किए हैं तो NDTV के मालिक को सीधे तौर से बचाने और चिदंबरम को परोक्ष रूप से बचाने के चक्कर में कांग्रेस मुद्दा भुला बैठी और इतनी बड़ी बात बोलने के बाद भी अगले दिन से ही ग़ुलाम नबी आज़ाद समेत पूरी कांग्रेस गूंगी हो गई। हाल ही के दिनों में कांग्रेस ने कई बेहतरीन प्रदर्शन करें हैं मगर इतनी बड़ी घटना का प्रदर्शन नहीं कर के कांग्रेस ने अपना पुराना गेम जारी रखा
✅अमित शाह ने मुद्दा क्यों नहीं उठाया है?
अमित शाह की इमेज क्या है सबको पता है कि उन्हें इस घटना में भी अपना फ़ायदा निकाल लिया और मेरा मानना है कि NDTV को आंखें दिखा दी होंगी। अब NDTV अमित शाह के ऐसान तले दब गया है और आने वाले समय में केवल भाजपा विरोधी चैनल NDTV भाजपा का उतना पुरज़ोर विरोध नहीं कर पाएगा। दिन पर दिन NDTV की धार कमज़ोर होती जाएगी। और ये शुरू हो भी चुका है क्योंकि रवीश के जहाँ हर एपिसोड मोदी विरोधी होते थे वहाँ अब वो अपना रास्ता भटक रहे हैं और पब्लिक को ऐसा लग रहा है कि मजा क्यूं नहीं आ रहा प्राईम टाईम में। रवीश को सिर्फ़ मोदी विरोधी ख़बरों के लिए जाना जाता था और अब अगर वो मोदी विरोधी ख़बर ही नहीं चलाएंगे तो बेचारे गुमनाम हो जाएंगे। 


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