शेखावाटी में गिरते हूए शिक्षा के स्तर को उठाने के लिए राज्य सरकार ने एक ईमानदार कुलपति को पंडित दीनदयाल उपाध्याय शेखावाटी विश्वविद्यालय ,सीकर में नियुक्त किया । दो-दो कमरों में चलने वाले इन बीएड महाविद्यालयों ने पिछले वर्ष संबद्धता अभिवृद्धि का विरोध किया । प्रयोगशाला, पुस्तकालय और शिक्षक रहित इन महाविद्यालयों ने विद्यार्थियों को लूटना प्रारंभ किया । कभी टूअर,कभी फाइनल प्रैक्टिकल ,कभी अनुपस्थिति के नाम पर  लूटते हैं । नियमित आने वालों को परेशान करना और नियमित नहीं आने वालों से 25-30000 हज़ार रुपए रिश्वत के लिए जाते हैं । मानसिकरूप से पीड़ित विद्यार्थीवृन्द ने बहुधा कुलपति को शिकायत की है । ऐसी कम से कम सैंकडों शिकायत कुलपति के पास है ।एक बौद्धिक वर्ग लगातार कुलपति पर दबाव बना रहा था कि शेखावाटी की शिक्षा की दयनीय स्थिति पर आप विचार कर कार्रवाई कीजिए ।

निजीमहाविद्यालय शिक्षा संघा ने  कुलपति प्रोफेसर बीएल शर्मा की छवि ख़राब करने के लिए भास्कर समाचार- पत्र का सहारा लिया । इस समाचार -पत्र ने अपना ज़मीर बेच दिया । यह समाचार-पत्र चाहता है कि इन महाविद्यालयों को बिना संबद्धता अभिवृद्धि के मान्यता मिल जाए । यह पत्र ऊलजलूल लिख रहा है । क्या समाचार-पत्र का कोई दायित्व नहीं है कि वो शिक्षा के गिरते स्तर को सुधारे ? समाचार पत्र स्वयं एक पार्टी बन गया है । ऐसे में शेखावाटी के शिक्षा का भविष्य क्या होगा ?  समाचार-पत्र से उम्मीद करते हैं कि वह तटस्थ रहें मगर इस अख़बार ने तो चाटुकारिता की हद कर दी है । समाचार पत्र नोन मैट्रिक संचालकों के लिए शिक्षाविद्  शब्द का प्रयोग करता है । इन पत्रकारों को और संचालकों को यह भी पता नहीं कि शिक्षा की परिभाषा क्या है ? और विद् धातु है या लिंग है ,उपसर्ग है या  प्रत्यय । 22 साल से मैं इसका नियमित पाठक हूँ । जय प्रकाश चौकसे एम रघुरामन,पं विजयशंकर मेहता,चेतन भगत ,प्रीतीश नंदी,वेदप्रकाश वैदिक के लेखों के प्रति मेरी आत्मीयता रही है । किन्तु शेखावाटी से निकलने वाले पत्र ने मुझे उद्वेलित कर दिया । एक शिक्षक होने के नाते मैंने इस पीड़ा को शिद्दत से महसूस किया है । मैं आज इसका परित्याग करता हूँ । होकर को आज से ही यह पत्र लौटा रहा हूँ। कौनसा पढ़ा जावें ,आपकी राय चाहता हूँ।
राजेन्द्र मधुकर की वाल से



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