जयपुर : गठबंधन होने से सामने वाली पार्टी प्रेशर में आ जाती है और उसके वोट प्रतिशत में बड़ी गिरावट आ जाती है मगर ऐसा भी होता है कि सामने वाली पार्टी को ज्यादा वोट मिल जाते हैं ऐसा ही हुआ है नागौर में

2014 बनाम 2019 की स्तिथि 

ज्योति मिर्धा और हनुमान बेनीवाल दोनों ही पिछली लोक सभा में खड़े हुए थे मगर सीट भाजपा के सी आर चौधरी ने निकाली थी वो भी बड़े मार्जिन से, उन्हें 414791 वोट मिले थे वहीँ ज्योति मिर्धा को 3,39,573 और हनुमान बेनीवाल को 1,59,980 वोट मिले थे

2014 लोक सभा और 2019 विधान सभा में बेनीवाल का वोट में बदलाव नहीं 

गठबंधन से पहले बेनीवाल ने 2019 विधान सभा में अपने कैंडिडेट उतारे थे जिनके वोट बेनीवाल के माने जा सकते हैं और उसके पहले 2014 आम चुनाव में बेनीवाल खुद कैंडिडेट उतरे थे, दोनों ही चुनाव में बेनीवाल के वोट में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया, जहाँ 2014 में 1,59,980 वोट मिले थे वहीँ बेनीवाल के सभी कैंडिडेट जो नागौर लोकसभा कोंस्टीटूएंसी में आते हैं उनको मिलाकर केवल 1,47,172 वोट मिले मतलब कोई बड़ा बदलाव नहीं मिला
पूरे राजस्थान में भाजपा का वोट शेयर 20 प्रतिशत तक बढ़ा वहीँ कांग्रेस का वोट शेयर सबसे ज्यादा नागौर में बढ़ा 

ज्योति मिर्धा के इतने वोट कैसे बढे 

जहाँ ज्योति मिर्धा ने पिछले चुनाव में 3,39,573 वोट लिए वहीँ 2019 में उन्होंने 4,78,791 वोट लिए जो राज्य की दूसरी सीटों के मुकाबले कांग्रेस की सबसे अच्छी स्तिथि बना गए | केवल नागौर लोक सभा ही उन गिनी चुनी सीटों में रही जहाँ कांग्रेस अपना वोट प्रतिशत इतने बड़े मार्जिन से बढ़ा पायी |

भाजपा अपने कैंडिडेट के साथ आती तो भी आराम से जीत रही थी 

अगर पूरे राजस्थान में भाजपा के वोट शेयर की बढ़त को देखा जाए तो नागौर में भी भाजपा तगड़ी लीड में थी और अपना कैंडिडेट उतार कर बेहद आराम से जीत सकती थी

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