जयपुर : गठबंधन को लेकर भाजपा में अजीब स्तिथि आ गई है क्यूंकि ये समझ नहीं आ रहा कि उससे भाजपा को फायदा हुआ है या कांग्रेस को, आंकड़ों से जानिये

किन सीटों को गठबंधन से थोड़ा बहुत प्रभावित माना जा सकता है ?

जिन पांच सीटों को गठबंधन से प्रभावित मानकर भाजपा चल रही थी वहां वहां कांग्रेस का वोट शेयर पिछले चुनावों के मुकाबले बड़े स्तर पर बढ़ा है और ऐसा लग रहा है कि मोदी  फैक्टर नहीं होता तो गठबंधन का नेगेटिव असर नुक्सान में भी ला सकता था | ये पांच सीटें नागौर, जोधपुर, राजसमंद ,बाड़मेर और चूरू मानी जा रही थी

बाकी राजस्थन का क्या हाल है 

जहाँ भाजपा ने 2014 के मुकाबले 2019 में पूरे राज्य में बढ़त बनाई है वहीँ कांग्रेस केवल कुछ स्थानों पर ही बढ़त बनाती देखी गई और इत्तेफाक ये है कि ये सीटें नागौर समेत आस पास की ही सीटें हैं और ऐसी जगह हैं जहाँ पर बेनीवाल की पार्टी का कोई बहुत बड़ा वोट शेयर नहीं था मगर फिर भी बेनीवाल प्रचार करने गए थे

पूरे आंकड़ों से समझिये कितने फायदा का रहा गठबंधन कांग्रेस के लिए 

गुजरात, हरयाणा की ही तरह राजस्थान भी पूरा मोदी के रंग में था और बीच में ऐसा कोई किला नहीं जो मोदी के सामने टिका हो, इसके चलते ये माना जा सकता है कि पूरे क्षेत्र की ही तरह यहाँ भी मोदी फैक्टर उतना ही पावरफुल था जितना दूसरी सीटों पर कांग्रेस को ख़ास बढ़त नहीं दिखी मगर चार सीटों पर बढ़त साफ़ तौर पर देखी गई

  1. नागौर : जहाँ पिछले आम चुनाव में कांग्रेस की ज्योति मिर्धा को 3,39,573 वोट मिले थे वहीँ इस बार बढ़कर  4,78,791 वोट मिले  
  2. राजसमंद : जहाँ  पिछले आम चुनाव में कांग्रेस के गोपाल सिंह शेखावत को 2,49,089 वोट मिले थे वहीँ इस बार वोट बढ़कर देवकीनंदन काका को 3,11,123 वोट मिले 
  3. चूरू : जहाँ कांग्रेस के प्रताप सिंह पिछले आम चुनाव में केवल 1,76,912 वोट ली पाए थे वहीँ इस बार रफीक मंडेलिया  4,58,597 वोट ले गए 
  4. जोधपुर : जहाँ पिछली बार चंद्रेश कुमारी को 3,03,464 वोट ही मिले थे वहीँ इस बार वैभव गेहलोत को बढ़कर 5,14,448 वोट मिले 
  5. बाड़मेर : जहाँ हरीश चौधरी कांग्रेस के खड़े होकर पिछली बार 2,20,881 ही वोट ले पाए थे वहीँ इस बार मानवेन्द्र सिंह ने वोट बढाकर 5,22,718 कर दिए 

जहाँ जहाँ हनुमान गए वहां वहां कांग्रेस के वोट बढे 

आंकड़ें खुद बता रहे हैं कि  भाजपा का वोट प्रतिशत तो हर जगह की भाँती ही बढ़ा है वहीँ कांग्रेस का वोट प्रतिशत हनुमान बेनीवाल की प्रचार वाली जगह पर बाकि जगह के मुकाबले ज्यादा बढ़ा है | यह बात सबसे महत्वपूर्ण है कि स्वयं बेनीवाल की ही सीट पर कांग्रेस ने एक लाख चालीस हज़ार ज्यादा वोट लिए हैं जितने वोट बेनीवाल की पार्टी को कुछ महीने नगर लोक सभा सीट में आने वाली सभी विधान सभा के मिलकर पहले टोटल मिले थे

2014 लोक सभा और 2019 विधान सभा में बेनीवाल का वोट में बदलाव नहीं 

गठबंधन से पहले बेनीवाल ने 2019 विधान सभा में अपने कैंडिडेट उतारे थे अगर उन सभी के वोट बेनीवाल के वोट माने जाते हैं और उसके पहले 2014 आम चुनाव में जब बेनीवाल खुद कैंडिडेट उतरे थे, दोनों ही चुनाव में बेनीवाल के वोट में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया, जहाँ 2014 में 1,59,980 वोट मिले थे वहीँ बेनीवाल के सभी कैंडिडेट जो नागौर लोकसभा कोंस्टीटूएंसी में आते हैं उनको मिलाकर केवल 1,47,172 वोट मिले मतलब कोई बड़ा बदलाव नहीं मिला

बेनीवाल फैक्टर माइनस और मोदी फैक्टर प्लस करने पर क्या आता है 

अगर बाकी राजस्थान की ही तरफ नागौर लोक सभा सीट पर बेनीवाल अलग लड़ते और भाजपा अपना अलग कैंडिडेट उतार देती, साथ ही जो मोदी फैक्टर के तौर पर राइज मिल रहा है उसके चलते कांग्रेस को ज्यादा नुकसान होता और बेनीवाल की खिलाफत वाले करीब एक लाख वोट ज्योति मिर्धा की जगह भाजपा को जा सकते थे और भाजपा अकेली भी 7 लाख वोट लेकर बड़े मार्जिन से जीतती जहाँ अभी केवल एक लाख अस्सी हज़ार से ही गठबंधन सीट मिली है

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