सीकर : पिछले कुछ दिनों से एक वीडियो बहुत ज्यादा पॉपुलर हो रहा है, जो 10 महीने में केवल 2 लाख देखा अचानक एक दिन में 25 लाख देख लिया गया, ऐसा नहीं है कि इस घटना का केवल यही वीडियो चला हो, इससे पहले इसी घटना का एक अन्य वीडियो 50 लाख बार देखा जा चुका था आखिर ये हुआ कैसे

पत्रकार अमित शर्मा की पुलिस ने की पिटाई तो ये वीडियो हो गया वायरल 

उत्तर प्रदेश में एक पत्रकार अमित शर्मा की पिटाई हुई जिसके बाद उसे जेल में बंद कर दिए, पिटाई साधारण हुई थी और शर्मा को ज्यादा चोटें नहीं आयी थी मगर उसके एवज में पत्रकार यशवंत चौधरी का पुराना वीडियो वायरल हो गया

पत्रकार चौधरी के साथ कौन आया था उस समय 

अगर पत्रकार शर्मा की जगह चौधरी होता है तो मीडिया का रवैया पूरी तरह उलट हो जाता है , मीडिया में दो चार साल रहे किसी भी पत्रकार से पूछ लो वो खुद बता देगा कि प्रमोशन के लिए शर्मा होना ज्यादा अच्छा होता है, पत्रकार चौधरी पर मारपीट के समय काफी कुछ ऐसा ही हुआ था, उसको पहले मारा, ईंटों से मुँह पर कई वार किये, नाक तोड़ दी, आँख फोड़ने की कोशिश की और जनता के दबाव बनाने पर पुलिस ने CCTV फुटेज भी जारी की जो कई लाख लोगों ने देखी मगर यहाँ से मामला पूरा बदल गया

क्या अन्याय हुआ 

पहला तो ये कि पत्रकारों पर आरोप है कि निजी हस्पताल जिसका अच्छा ख़ासा पैकेज चलता है अख़बारों में उसने सीधा एडिटर को चुग्गा डाल दिया, जिसके बाद कई पत्रकार इकट्ठे होकर पुलिस कण्ट्रोल रूम पहुंचे और कहा कि चौधरी को गिरफ्तार कर लो, 50 लाख से ज्यादा लोगों के वीडियो देख लिए जाने के बाद भी अख़बारों में उसे अंदर के पेज पर बहुत छोटी सी साधारण घटना की तरह छाप दिया इसके साथ ही अनजान पत्रकारों ने भी चौधरी के खिलाफ पुलिस में FIR करवा दी

क्या क्या थी FIR 

पहली FIR अरविन्द शर्मा ने करवाई जो कि दैनिक भास्कर में सब एडिटर था, उसने पहले सोशल मीडिया पर जाटों के खिलाफ टिपण्णी की जिसको चौधरी ने शेयर कर टिपण्णी की कि जाटों के खिलाफ क्यों लिख रहा है जिसको अरविन्द शर्मा ने FIR की कि चौधरी ने उसकी अन्य टिपण्णी को एडिट कर दी जबकि फेसबुक पर कोई किसी दूसरे की टिपण्णी एडिट नहीं कर सकता फिर भी पुलिस ने FIR लिखी

दूसरी FIR क्या थी 

पत्रकार चौधरी जिस मजदुर लालचंद सैनी का पक्ष जानने के लिए अस्पताल गया था और जिसके लिए सैनी समाज एकजुट होकर कलेक्ट्रट के सामने अगले दिन धरना दे रहा था उसी के समाज के फोटो जर्नलिस्ट विशाल सैनी जिसकी चौधरी से कोई जान पहचान नहीं थी और चौधरी उसको जनता भी नहीं था उसने कम्प्लेन करी कि यशवंत चौधरी ने उसका कैमरा तोड़ दिया और सोने की चैन लूट ली

समाज आगे क्यों नहीं आया 

मामला हाथों से निकल जाने पर जाट समाज की ठेकेदारी करने वाले लोग तेजाजी का नाम लेकर खीमसर से सीकर आये और नेता ने सर्किट हाउस में पत्रकार को बुलाया, पत्रकार चौधरी ने सोचा कि शायद समाज के लोग साथ देने आये हैं मगर उसको वहां बुरी तरह धमकाया गया और केस वापस लेने का दबाव बनाया, साथ ही दूसरे समाज (राजपूत समाज ) के किसी भी नेता को मीडिया कवरेज नहीं देने की चेतावनी दी गई

गुंडागर्दी की जड़ कहाँ कहाँ तक 

न केवल खिमसर के जाट नेता ने आकर पत्रकार को डराया धमकाया और केस वापस लेने की कोशिश की बल्कि जब कई महीने बीत गए और केस वापस नहीं लिया गया तो खिमसर जाट नेता ने अपने सभी समर्थकों से चौधरी पर गाली निकाली, जान से मारने की धमकी दी और फ़ोन पर घर से बाहर निकलते ही गोली से उड़ा देने की बात कही जिसके कई फोन रिकॉर्डिंग डॉ चौधरी के पास हैं, इसी घटनाक्रम में समर्थों द्वारा ये भी लीक हो गया कि पिछले हमले के लिए भी लोग नागौर से भेजे गए थे और इस बार इससे भी बड़ा हमला करके काम तमाम कर दिया जाएगा


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