गुर्जर आंदोलन से सम्बंधित सीकर टाइम्स के पास मीडिया में प्लांट की हुई फर्जी खबरें और असली फैक्ट्स मौजूद हैं। पहले भी ऐसा देखा गया है कि मीडिया निष्पक्ष होने के बजाय पक्षपाती हो जाता रहा है क्योंकि ख़बरों का निर्धारण करने में जाति विशेष से ही ज्यादातारः लोग मौजूद हैं।

उदाहरण एक 

पद्मावती के आंदोलन के समय दिल्ली में करनी सैनिक बस को बचा रहे थे और अन्य लोग पथराव कर रहे थे, ऐसे में पूरी मीडिया ने जानबूझकर पथराव करने वालों को करनी सैनिक बताया। आजतक की लीक हुई फुटेज से पता चला कि ड्राइवर खुद बोल रहा था करनी सैनिक उन्हें बचाने का काम कर रहे थे मगर उस क्लिप को पूरी तरह दबा लिया गया। 

उदहारण दो

हरियाणा जाट आंदोलन के समय ऐसा कारनामा हुआ जो पूरे विश्व में एकमात्र उदहारण है। खबर प्लांट की गई कि आंदोलन के समय महिलाओं का बलात्कार हो गया जबकि न किसी ने रिपोर्ट लिखवाई, न कोई फोटो आई न कहीं कोई वीडियो आया मगर पूरी मीडिया ने छाती पीट पीटकर गाया कि जाट आंदोलनकारियों ने बलात्कार कर दिया। आजतक की रिपोर्टर अंजना ने तो झाड़ियों में पुराने कपडे को दिखाकर ये तक कह दिया कि जिसके ये कपडे हैं उसका बलात्कार हुआ ही होगा। साफतौर पर ऐसा लग रहा था कि मीडिया जिसमें ख़बरों का निर्धारण करने वालों में जाट नहीं है वो जमकर न सिर्फ बिना रिपोर्ट बलात्कार होने की पुष्टि कर रहे थे बल्कि आरोपी का नामोनिशान तक नहीं होने पर भी उसकी जाती जाट बता रहे थे जो जाटों के प्रति भयंकर द्वेष जैसा लग रहा था

ताजा उदाहरण

गुर्जर आंदोलनकारी अपनी मॉंगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं और पुलवामा में आतंकवादी हमला हुआ जिसके लिए पूरे देश में रोष है मगर आतंकवादियों के प्रति रोष को गुर्जर आंदोलन के साथ जोड़ देने की हद से ज्यादा कोशिष की गई है। इस प्रकार खबर बनाई गई है जिससे जनता को आंदोलन के खिलाफ किया जा सके। दो अलग अलग वाकयों को एकसाथ बताना और बुरी तरह संवेदनाओं को उद्वेलित कर देना पत्रकारिता का सबसे निचला दर्जा है। दूसरों को नसीहत देने वाला भास्कर खुद कोबरा पोस्ट के स्टिंग में बेनकाब तब हुआ था जब इसके मालिक पैसे लेकर माहौल बनाने की डील करते दिखाई दिए थे। इस अखबार में अनेकों अनेक बार अपराधी संस्थाओं का नाम न लिख कर केवल निजी संस्थान लिख दिया जाता है और अगले ही दिन उसी संस्था के महंगे विज्ञापन छपे मिलते हैं। शर्म करो। 

ऐसे ही गुर्जर आंदोलन के साथ जो बड़े खेल हुए हैं और गलत खबरें उड़ाई गई हैं उसकी पूरी पोल हम खोलेंगे और समाज से आह्वान करेंगे की अपने रिपोर्टर तैयार करो साथ ही मीडिया में खबर निर्धारण करने में समाज से कितने लोग आते हैं इसका आंकलन करवाओ। रिपोर्टर केवल रिपोर्ट देता है वो किस प्रकार छपेगी और नहीं छपेगी उसका निर्धारण रिपोर्टर नहीं एडिटर करता है।
सीकर टाइम्स पूरा समर्थन देगा




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